नई दिल्ली: बॉलीवुड में दोस्ती पर कई यादगार गाने बने हैं, लेकिन फिल्म ‘तिरंगा’ का ‘पीले पीले ओ मोरे राजा, पीले पीले ओ मोरे जानी’ आज भी यारों की महफिल में खास जगह रखता है। नाना पाटेकर और राजकुमार पर फिल्माए गए इस गाने को दोस्ती का एंथम तक कहा जाता है। इसकी खासियत यह है कि गाने के जरिए दोस्ती को सिर्फ दिखाया नहीं गया, बल्कि उसे एक अलग अंदाज में परिभाषित किया गया।
दुश्मनी से दोस्ती तक पहुंचती है कहानी
फिल्म में राजकुमार ने ब्रिगेडियर सूरज सिंह और नाना पाटेकर ने शिवाजीराव वागले का किरदार निभाया है। कहानी में दोनों शुरुआत में एक-दूसरे के दुश्मन होते हैं, लेकिन बाद में दोस्त बन जाते हैं। इसी दोस्ती के जश्न के तौर पर यह गाना आता है।
गाने की शुरुआती पंक्तियां ही दोस्ती के रिश्ते की बराबरी को सामने रखती हैं। इसमें कहा गया है कि दोस्ती में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि सबसे जरूरी यारी निभाना है।
हर पंक्ति में दोस्ती और रिश्ते की गहराई
इस गाने को संतोष आनंद ने लिखा है। गाने में शराब और जाम के रूपकों के जरिए जिंदगी और दोस्ती की गहरी बात कही गई है। दोस्त को जिंदगी का अहम हिस्सा बताते हुए यह एहसास कराया गया है कि सच्ची दोस्ती में एक-दूसरे की जरूरत और साथ सबसे ऊपर होता है।
गाने की यही भावना इसे आम गीतों से अलग बनाती है। दोस्ती को लेकर लिखी गई इसकी पंक्तियां आज भी पुराने दोस्तों को अपनी यादों से जोड़ देती हैं।
नाना पाटेकर और राजकुमार की केमिस्ट्री ने बनाया खास
‘पीले पीले ओ मोरे राजा’ का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया है और इसे मोहम्मद अजीज और सुदेश भोसले ने आवाज दी है। हालांकि गाने को खास पहचान नाना पाटेकर और राजकुमार की जोड़ी से मिली।
एक तरफ राजकुमार का रॉयल अंदाज और दूसरी तरफ नाना पाटेकर की देसी मस्ती, दोनों का मेल गाने को यादगार बनाता है। पर्दे पर दोनों को साथ झूमते देखकर दोस्ती का वही बेफिक्र अंदाज नजर आता है, जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं।
33 साल बाद भी क्यों याद किया जाता है गाना?
‘तिरंगा’ का यह गाना समय के साथ पुराना जरूर हुआ, लेकिन दोस्तों की महफिलों में इसकी मौजूदगी कम नहीं हुई। पुराने दोस्तों के मिलने पर इस गाने को गुनगुनाने की परंपरा आज भी दिखाई देती है।
यही वजह है कि नाना पाटेकर और राजकुमार पर फिल्माया गया यह गाना दोस्ती के यादगार गीतों में गिना जाता है। इसकी धुन, बोल और दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री इसे आज भी खास बनाए हुए हैं।
‘पीले पीले’ के बोलों में यारी का रंग
गाने में ‘यार की है यारी निभानी’ जैसी पंक्ति दोस्ती के मूल भाव को सामने रखती है। ‘तुम तुम हो, हम हम हैं, न तुम कम हो न हम कम हैं जानी’ के जरिए दोस्ती में बराबरी का संदेश दिया गया है।
गाने में दोस्ती को जरूरत, मोहब्बत और इबादत जैसे भावों से जोड़ते हुए यह बताया गया है कि सच्चे दोस्त का साथ जिंदगी में कितना मायने रखता है।
