‘एक मच्छर…’ नाना पाटेकर का वो डायलॉग, जो ‘यशवंत’ से निकलकर बना पॉप कल्चर का हिस्सा; आज भी गूंजती है आवाज

मुंबई: नाना पाटेकर को याद करने के लिए किसी खास मौके की जरूरत नहीं थी। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और पर्दे पर किरदार में उतर जाने की कला ऐसी थी कि उनके कई डायलॉग फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के बीच जिंदा रहे। इनमें 1997 की फिल्म ‘यशवंत’ का ‘एक मच्छर…’ वाला संवाद ऐसा है, जो फिल्म और किरदार की पहचान से भी आगे निकल गया।

‘यशवंत’ का वो किरदार, जिसने छोड़ी गहरी छाप

1997 में आई ‘यशवंत’ में नाना पाटेकर ने इंस्पेक्टर यशवंत लोहार का किरदार निभाया था। वह एक ईमानदार लेकिन बेहद गुस्सैल पुलिस अधिकारी थे, जो व्यवस्था के भीतर फैले भ्रष्टाचार से जूझते हैं।

फिल्म भले ही अपने आप में बहुत बड़ा सिनेमाई मुकाम हासिल नहीं कर सकी, लेकिन नाना पाटेकर के अभिनय ने इसे यादगार बना दिया। खासकर ‘एक मच्छर…’ वाला संवाद उनकी पहचान के साथ इस तरह जुड़ा कि कई लोगों को आज भी फिल्म या किरदार का नाम याद न हो, लेकिन यह संवाद सुनते ही नाना की आवाज और चेहरा आंखों के सामने आ जाता है।

एक मच्छर से शुरू होकर जिंदगी पर सवाल

इस संवाद में नाना पाटेकर की आवाज में गुस्सा और बेचैनी साफ महसूस होती थी। एक छोटे से मच्छर का उदाहरण देकर संवाद आम इंसान की जिंदगी की मजबूरियों और रोजमर्रा की एक जैसी जिंदगी पर सवाल खड़ा करता है।

नाना की खासियत सिर्फ संवाद के शब्दों में नहीं थी। वह अपनी आवाज, ठहराव और चेहरे के भाव से शब्दों में ऐसी जान डाल देते थे कि वह संवाद सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं रहता था, बल्कि दर्शकों के जेहन में अपनी जगह बना लेता था।

नाना के डायलॉग क्यों बन जाते थे यादगार?

‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘यशवंत’, ‘अब तक छप्पन’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में नाना पाटेकर ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। कभी उनके अभिनय में गुस्सा और दर्द दिखा, तो कभी सख्ती और हास्य ने दर्शकों को खूब हंसाया।

उनके संवादों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह उन्हें सिर्फ बोलते नहीं थे, बल्कि किरदार के भीतर से निकालते हुए नजर आते थे। यही वजह रही कि उनके कई संवाद फिल्मों से निकलकर लोगों की रोजमर्रा की बातचीत और पॉप कल्चर का हिस्सा बन गए।

नई पीढ़ी के लिए ‘उदय शेट्टी’, लेकिन विरासत इससे कहीं बड़ी

नई पीढ़ी नाना पाटेकर को ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी के रूप में भी खूब याद करती है। ‘कंट्रोल उदय, कंट्रोल’ जैसे संवाद आज भी मीम्स और सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होते हैं। लेकिन नाना की पहचान सिर्फ इस हास्य किरदार तक सीमित नहीं रही।

‘क्रांतिवीर’ के प्रताप नारायण तिलक से लेकर ‘यशवंत’ के यशवंत लोहार तक उनके कई किरदारों ने दर्शकों को झकझोरा। उनके संवादों में व्यवस्था, समाज, आम आदमी की परेशानी, गुस्सा और दर्द अलग-अलग रूपों में सामने आया।

नाना चले गए, लेकिन आवाज रह गई

8 अक्टूबर 2026 को 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके किरदार और संवाद एक बार फिर याद किए जा रहे हैं। उन्हें याद करने के लिए शायद किसी लंबे भाषण की जरूरत भी नहीं है।

बस ‘एक मच्छर…’ कहिए और नाना पाटेकर की वही तीखी आवाज कानों में गूंजने लगती है। यही किसी कलाकार की असली विरासत है कि उसके जाने के बाद भी उसके निभाए किरदार और बोले हुए शब्द लोगों की यादों में जिंदा रहें।

 

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