नई दिल्ली: परिणीति चोपड़ा, देवेन भोजानी, अमोल पालेकर, शेखर सुमन और आदिल हुसैन जैसे कलाकारों से सजी क्राइम-ड्रामा फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’ 9 अक्टूबर 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। निर्देशक ध्रुव त्रिपाठी की यह फिल्म अवैध रेत खनन के खतरनाक कारोबार, भ्रष्टाचार और इसके आम लोगों की जिंदगी पर पड़ने वाले असर को सामने लाती है। फिल्म एक ऐसे काले धंधे की पड़ताल करती है, जहां रेत की कीमत इंसानी जान से भी ज्यादा अहम हो जाती है। हालांकि, गंभीर मुद्दे पर बनी यह फिल्म अपनी कहानी और कलाकारों के दम पर कितना असर छोड़ पाती है? आइए जानते हैं।
क्या है ‘रिपोर्टिंग लाइव’ की कहानी?
फिल्म की कहानी संध्या यादव (परिणीति चोपड़ा) नाम की एक निडर और महत्वाकांक्षी पत्रकार के इर्द-गिर्द घूमती है। उसके साथ कैमरामैन विनोद (देवेन भोजानी) भी काम करता है। एक गांव में पुल टूटने से कई स्कूली बच्चों की मौत हो जाती है। इस हादसे की रिपोर्टिंग करने पहुंची संध्या को वहां अवैध रेत खनन से जुड़े एक बड़े मामले का सुराग मिलता है।
जांच के दौरान उसे पता चलता है कि रेत के गैरकानूनी कारोबार का असर सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। इसकी वजह से नदियों का रुख बदल रहा है, आसपास के खेत बंजर हो रहे हैं और नदी पर बने पुलों की मजबूती भी प्रभावित हो रही है। इन हालात में लोगों की जान तक खतरे में पड़ रही है, लेकिन इस कारोबार के खिलाफ खुलकर बोलने को कोई तैयार नहीं है।
संध्या जब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश करती है, तो उसे पता चलता है कि रेत माफिया का नेटवर्क काफी ताकतवर लोगों तक फैला हुआ है। शिवा काका (अमोल पालेकर) और मंगेश (पितोबाश त्रिपाठी) की मदद से वह इस अवैध कारोबार की परतें खोलने लगती है। लेकिन सच सामने लाने की यह कोशिश उसके लिए कितनी खतरनाक साबित होती है, यही फिल्म का अहम हिस्सा है।
रेत के काले कारोबार पर गंभीर सवाल उठाती है फिल्म
ध्रुव त्रिपाठी ने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म में एक जरूरी सामाजिक मुद्दे को उठाया है। अवैध रेत खनन के जरिए होने वाली कमाई, पर्यावरण को पहुंचने वाला नुकसान और इस कारोबार से आम लोगों की जिंदगी पर पड़ने वाले असर को फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है।
कहानी इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के जरिए आगे बढ़ती है और बताती है कि एक पत्रकार के लिए ताकतवर लोगों के खिलाफ सबूत जुटाना कितना मुश्किल हो सकता है। फिल्म का विषय गंभीर है और इसकी कहानी वास्तविक घटनाओं से मिलती-जुलती परिस्थितियों की याद दिलाती है। हालांकि, अवैध खनन के पीछे मौजूद राजनीतिक सांठगांठ को कहानी में उतनी गहराई से नहीं दिखाया गया, जितनी उम्मीद की जा सकती थी।
कहानी में दम है, लेकिन स्क्रीनप्ले छोड़ता है कुछ कमी
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विषय है। निर्देशक ने कहानी को यथार्थवादी अंदाज में पेश करने की कोशिश की है और अनावश्यक ड्रामे से बचने का प्रयास किया है। इसके बावजूद स्क्रीनप्ले को और मजबूत बनाया जा सकता था।
कहानी में आने वाले कुछ ट्विस्ट पहले ही समझ में आने लगते हैं, जिससे वे दर्शकों को ज्यादा चौंका नहीं पाते। वहीं, फिल्म में कई भावनात्मक पल भी हैं, लेकिन वे उतना गहरा असर नहीं छोड़ते कि दर्शक पूरी तरह उनसे जुड़ सकें। एक गंभीर मुद्दे पर बनी फिल्म से जिस भावनात्मक तीव्रता की उम्मीद होती है, वह हर जगह नजर नहीं आती।
परिणीति चोपड़ा से ज्यादा दमदार अभिनय की थी उम्मीद
संध्या यादव के किरदार में परिणीति चोपड़ा ने अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन उनके अभिनय में और ज्यादा तीव्रता की गुंजाइश महसूस होती है। फिल्म की कहानी एक जुझारू पत्रकार की है, इसलिए उनके किरदार से और प्रभावशाली प्रदर्शन की उम्मीद रहती है।
अमोल पालेकर, शेखर सुमन, शाश्वत चटर्जी और आदिल हुसैन जैसे अनुभवी कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं। सभी कलाकार अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन दिग्गजों की मौजूदगी का असर कहानी में उतनी मजबूती से सामने नहीं आता।
देवेन भोजानी की एक्टिंग फिल्म का मजबूत पक्ष
फिल्म में देवेन भोजानी का काम खास तौर पर प्रभावित करता है। कैमरामैन विनोद के किरदार में उनका अभिनय सहज और प्रभावी है। वह अपने प्रदर्शन से कहानी को मजबूती देते हैं और कई जगह ध्यान खींचते हैं।
तकनीकी स्तर पर भी फिल्म ठीक नजर आती है। हालांकि, बेहतर स्क्रीनप्ले और कुछ दृश्यों में ज्यादा भावनात्मक गहराई इसे और असरदार बना सकती थी।
‘रिपोर्टिंग लाइव’ देखें या नहीं?
‘रिपोर्टिंग लाइव’ एक ऐसे मुद्दे को सामने लाती है, जिस पर बात करना जरूरी है। अवैध रेत खनन और उससे जुड़े खतरों की पड़ताल करती यह फिल्म सामाजिक सरोकार वाली कहानियां पसंद करने वाले दर्शकों को आकर्षित कर सकती है।
हालांकि, कमजोर पड़ते स्क्रीनप्ले और अनुमान लगाए जा सकने वाले ट्विस्ट के कारण फिल्म हर मोड़ पर प्रभाव नहीं छोड़ पाती। इसके बावजूद गंभीर विषय और देवेन भोजानी का अच्छा अभिनय इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं। फिल्म को क्रिटिक्स ने 5 में से 3 स्टार दिए हैं।
